शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

बस यूं ही

बस यूं ही 

थी धूप खिली
कुछ छांव लिये
बगिया में पात
कुछ झरे पड़े
कुछ फूल खिले
कुछ मुरझाये
कुछ कलिकां
गुमसुम सी इतराये
कुछ भ्रमर उड़े
कुछ तितली भी
मन ही मन मुस्काए
पल गदराये कुछ इतराये
आ पास मेरे यूं सहलाये
यास कहूं अनायास कहूं
खींच इन्हे, तुम्हे दिखलाए

उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोक भवन भोपाल
दिनांक : १०. ४. २०२६