सुर संधान, सुर संधान
दे तान वेणु पर मधुर मधुर
सप्त सुरों की गूंज मधुर
जगति छंद उतरे धृ पर
हो भोर सुवासित जगे प्राण ।
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान
टूट गये सुर से सब नाते
सरगम के सुर ना हैं भाते
खनक भरी सब के कानों में
सिसक रहा सबका है बिहान ।
सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान
राह अटपटी भाग रहे सब
ना, सम्बन्धो में राग रहे अब
जगति है चिन्तित जन व्याकुल हैं
मांग रहे सब इससे त्राण
.
सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान
हो चले आज सब रक्त पिपासू
तम पोषक, शोषक अविनासी
स्वच्छन्द विचरते घातक चहुंदिश
विचलित है हर साधु प्राण ।
सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान
वेणु, सुदर्शन संग ले आजा
भयभीत धरा को धैर्य बंधा जा
विश्वास सभी का डोल गया
है टूट रही मानव पहचान ।
सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान
उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोकभवन , भोपाल
दिनांक : ०९.०७.२०२६