बुधवार, 11 मार्च 2026

तुम क्या शासन करागे मुझ पर
स्व पर शासन आता, तुम्हे कहां !
मनमानी मुझ पर थोप चलोगे
मन मेरा,माने, तब,  उसे कहां ।

सोच तुम्हारी ना रही हमारी
मानोगे तुम सबकी उसको
भेंड नही हम बुद्धि विवेक ले

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

नही कह सका अब तक
प्रणय वेदना हिय की
श्रवण करने को तत्पर तुम
कहां थी रागनी में खुद की

प्रखर ज्वाला हुई हिय की
घुमड़ बादल बहुत आये
बरसने को हो बेकल
नयन में आ घने छाये

था दृगों को भान इसका
न पायेंगे नेह वे तुम्हारा
जन्हु बन तभी तो गये वे
सोख जायेंगे नीर वो खारा

कभी मनीषा कभी प्रज्ञा 
कभी तो मन का हर कोना
कहता रहा क्यूं उलझता
न होगा उसका, तेरा होना

पर मानता कैसे वह
सरस दिल जो मेरा ठहरा
दृगों की रागनी से वह
लगा बैठा सरगमी पहरा

साज सारे ही हारे बज कर
सिमट शून्य पर जा ठहरे 
तुम बिखरी तारों सी जग पर
मैं पुच्छल सा गिरा जा रहा हूं।

न चीरा न पीड़ा न चेतना है
अनहद बढ़ चली है तड़पन
विमुखता तेरी सालती नित
नि:शब्द रोता है आंगन

नेह नीर न शीतल रहा अब
तपन है जलन है अगन है 
न बोल पाने की जो है पीड़ा
नाम तेरा व मेरा वो रूदन है ।

ताल था हृदय, नीर निर्मल 
शुष्क होता चला जा रहा है
धर धीर बैठा तट सरोवर
धुंध से कभी तो प्रकट होगी


उमेश कुमार श्रीवास्तव
रिवांचल एक्सप्रेस
भोपाल - रींवा यात्रा
दिनांक : २४.०२.२०२६




शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

निर्मोही

निर्मोही


निर्मोही कौन है
कर लो तनिक विचार
करे जो चिन्तन अहिर्निश
या जो करे न तनिक विचार ।

मन तो मोही ही रहे,
निर्मोही चित जान ।
अवरोध ज्ञान विवेक है,
ना प्रकट करे, ना दे भान ।

निर्मोह दशा अति प्रेम की,
रसिक कलंक ना आय ।
चिन्तन कर ठिठक रहे,
तेंहि ब्रम्हरूप पैठाय  ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोक भवन , भोपाल
दिनांक : २०.०२.२६

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

करो आह्वान ज्योति का
अन्धकार व्याप्त है
अब ज्ञान की धार से 
प्रकाश फैलता नही
तम घना घना सा है
ज्ञान से डोलता नही

भ्रमित तम कर रहा
ज्ञान के तेग को
खनक उसमें भर रहा
रोकता प्रकाश वेग को

गुरुवार, 22 जनवरी 2026

मिलन

मिलन

मिलन वह बिन्दु है जहां
अनेक कोमल अहसास
खो देते हैं अपना स्वरूप
या यूं कहें बदल लेते हैं
अपना स्वभाव स्वरूप ।

समानान्तर चलना
न बिछुड़ना न मिलना
सम्मोहन की निरन्तरता
आकर्षण की प्रबलता
रखता है बनाये ।

मेल बदल देता है स्वरूप
उभय का, क्षण में तल से
रूप नहीं रह जाता स्व का
आवेग,उन्माद बहुरुपिया
सोखता उभय व्यक्तित्व  ।

जन्म एकल, मृत्यु एकल
समानान्तर अगल बगल
मध्य लिपटी बहुलता
है बदली पल दर पल
ज्यूं मिलन ! सर्वस्व विस्मृत ।

न मिलन न विलगन, निर्लिप्त !
ऊर्जा का समानान्तर अनुगमन 
ब्रम्ह से ब्रम्ह तक निरन्तर
संरक्षित मूल तत्व अन्तस
कृष्णविवर सा उभयानन्द ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
नवजीवन विहार , सिंगरौली
दिनांक : २२.०१.२०२६



सोमवार, 5 जनवरी 2026

छुपा लूं आ तुझे पलकों में यूं
कि तुझे गुमनाम सा कर दूं
भले ही मै ना देख पाऊं तुझे
पर किसी को भी ना देखने दूं ।

दृग सहारे हिय में उतारूं तुझे
है गुहा जो नेह की
हिय के झरते नेह में भिगो कर
मरमरी गेह तेरी मैं संवारूं 

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

नव वर्ष पर

ग्रेगोरियन कैलेण्डर के वर्ष २०२५ की विदाई की व  नव वर्ष २०२६
के आगमन की  सभी को अनन्त शुभकामनाएं 
💐💐💐🙏🙏💐💐💐

जो जाने को आतुर बैठा
उसे रोक सका क्या कोई 
मोक्ष मिले यूं ऐसा जिसको
उसे टोक सका क्या कोई ।

बिदा करो सब प्रफुलित मन से
फल जो चाहे दिये रहा वो
कर्म नदी की राह रहा वह
विदा ले रहा आज है जो ।

छोड़ चला है वह अपनी थाती
नव आगन्तुक नये वर्ष को
विगत हुआ आगत कल जो था
आगत स्वागत सब कर लो ।

नये वर्ष की नई दिशाएं 
चहुंदिश जाती राहें है
गत आगत की संगम राहे
चलो हमें पुकारे हैं ।

नई रश्मि से, ले नई उमंगे
आगे कदम बढ़ायेंगे
इस पड़ाव से मंजिल तक
हम उज्ज्वल भविष्य बनायेंगे । 

उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोक भवन , भोपाल
दिनांक ३१. १२.२५