मंगलवार, 24 मार्च 2026

शेर

मार्च/24

इश्क इक जुनून सूफियायी है
रूह से रूह तक बहा करती है।


गमे जुदाई में लिपटी तेरी शोख़ तब्बस्सुम
आ के देखे कोई इश्क कहां जिन्दा है ।

उमेश

मंगलवार, 17 मार्च 2026

आँखें

आँखें

उठती कशक  दिल में
करती बयां हैं आँखें
खुशी हो या गम
छलक जाती हैं आँखें ।

चंद कतरे अश्क के
खोल देते हैं राज
न जाने कौन सा हुनर
घोल जाती है आँखे ।

कुछ राज़ चाह कर भी
दिल, छिपा नही पाता 
मुस्कुरा के पुतलियों से
जता जाती हैं आँखें ।

गम - ओ - गुस्सा हो
या इश्क की बेकरारी
रुमानियत से बंया सब
कर जाती हैं आँखे ।

जब जब मिली हैं आँखें
हर राज़ जान ली हैं
पलकों के पीछे ओट में
कब छिप सकी हैं आँखें ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
वन्दे भारत ट्रेन
भोपाल - मैहर यात्रा
दिनांक : २१. ०३ . २०२६








सोमवार, 16 मार्च 2026

युद्ध का कहर

जलती हुई चिताओं से
जल रहे शहर
चीखती राह भागती
बेकल हैं खंडहर

इंसान रह गया नही
इन्सानियत के संग
कंकरीटी जंगलों में
बरपा है वो कहर

बारूद में कहां ताब
गला दे हाड़ मांस
मद ने मानवों के
घोला है सब जहर ।

सुलगती चर्बीयां
महकती हर दिशा
असुरों दानवों का 
ज्यू चल रहा प्रहर ।

बुद्धि का विवेक से
हो गया विच्छेद
मद-लोभ-डाह संग है
जो दिखा रहे डगर ।

संस्कार अब रहा नही
न  सभ्यता  रही
लघु को मिटा दीर्घता
है बांटती कहर ।

विकाश होड़ चल रही
विनाश ले के संग
बचा सको बचा लो
अपने अपने घर ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोकभवन , भोपाल
दिनांक : २४.०३.२०२६



 



बुधवार, 11 मार्च 2026


११ मार्च २०२६
तुम क्या शासन करागे मुझ पर
स्व पर शासन आता, तुम्हे कहां !
मनमानी मुझ पर थोप चलोगे
मन मेरा,माने, तब,  उसे कहां ।

सोच तुम्हारी, ना रही हमारी
मानोगे तुम तो सबकी उसको
भेंड नही हम बुद्धि विवेक ले