सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

करो आह्वान ज्योति का
अन्धकार व्याप्त है
अब ज्ञान की धार से 
प्रकाश फैलता नही
तम घना घना सा है
ज्ञान से डोलता नही

भ्रमित तम कर रहा
ज्ञान के तेग को
खनक उसमें भर रहा
रोकता प्रकाश वेग को

गुरुवार, 22 जनवरी 2026

मिलन

मिलन

मिलन वह बिन्दु है जहां
अनेक कोमल अहसास
खो देते हैं अपना स्वरूप
या यूं कहें बदल लेते हैं
अपना स्वभाव स्वरूप ।

समानान्तर चलना
न बिछुड़ना न मिलना
सम्मोहन की निरन्तरता
आकर्षण की प्रबलता
रखता है बनाये ।

मेल बदल देता है स्वरूप
उभय का, क्षण में तल से
रूप नहीं रह जाता स्व का
आवेग,उन्माद बहुरुपिया
सोखता उभय व्यक्तित्व  ।

जन्म एकल, मृत्यु एकल
समानान्तर अगल बगल
मध्य लिपटी बहुलता
है बदली पल दर पल
ज्यूं मिलन ! सर्वस्व विस्मृत ।

न मिलन न विलगन, निर्लिप्त !
ऊर्जा का समानान्तर अनुगमन 
ब्रम्ह से ब्रम्ह तक निरन्तर
संरक्षित मूल तत्व अन्तस
कृष्णविवर सा उभयानन्द ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
नवजीवन विहार , सिंगरौली
दिनांक : २२.०१.२०२६



सोमवार, 5 जनवरी 2026

छुपा लूं आ तुझे पलकों में यूं
कि तुझे गुमनाम सा कर दूं
भले ही मै ना देख पाऊं तुझे
पर किसी को भी ना देखने दूं ।

दृग सहारे हिय में उतारूं तुझे
है गुहा जो नेह की
हिय के झरते नेह में भिगो कर
मरमरी गेह तेरी मैं संवारूं