निर्मोही
कर लो तनिक विचार
करे जो चिन्तन अहिर्निश
या जो करे न तनिक विचार ।
मन तो मोही ही रहे,
निर्मोही चित जान ।
अवरोध ज्ञान विवेक है,
ना प्रकट करे, ना दे भान ।
निर्मोह दशा अति प्रेम की,
रसिक कलंक ना आय ।
चिन्तन कर ठिठक रहे,
तेंहि ब्रम्हरूप पैठाय ।
उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोक भवन , भोपाल
दिनांक : २०.०२.२६
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें