बुधवार, 20 मई 2026

करता था प्यार दिल से, वो दिमाग ले के आई
महताब सा चमन था वो आफताब ले के आई
सुकूं से जी रहा था रुनझुन सी थी ख्वाहिशें
जमाने भर की वो तो दर्दे गुबार ले के आई ।
जी रहा हूं मैं , मरने के लिये
अमरत्व क्यूं पसंद हो जीने के लिये