गुरुवार, 9 जुलाई 2026

हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम

हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान

दे तान वेणु पर मधुर मधुर 
सप्त सुरों की गूंज मधुर
जगति छंद उतरे धृ पर
हो भोर सुवासित जगे प्राण ।

हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान


टूट गये सुर से सब नाते
सरगम के सुर ना हैं भाते
खनक भरी सब के कानों में
सिसक रहा सबका है बिहान ।

सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान

राह अटपटी भाग रहे सब
ना, सम्बन्धो में राग रहे अब
जगति है चिन्तित जन व्याकुल हैं
मांग रहे सब इससे त्राण
.
सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान

हो चले आज सब रक्त पिपासू
तम पोषक, शोषक अविनासी
स्वच्छन्द विचरते घातक चहुंदिश
विचलित है हर साधु प्राण ।

सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान

वेणु,  सुदर्शन  संग ले आजा 
भयभीत धरा को धैर्य बंधा जा
विश्वास सभी का डोल गया
है  टूट रही मानव पहचान  ।


सुर संधान, सुर संधान
हे कृष्ण मुरारी राधे श्याम -२
सुर संधान, सुर संधान


उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोकभवन , भोपाल
दिनांक : ०९.०७.२०२६

रविवार, 5 जुलाई 2026

गधे हैं

इधर भी गधे हैं , उधर भी गधे हैं
जहां भी नज़र हो उधर ही गधे हैं ।

कुछ राही गधे हैं ,कुछ माही गधे हैं
मुकुट कुछ हैं पहने वो शाही गधे हैं ।

कुछ गम्भीर दिखते शालीनता ओढ़े
वो विरादरी में अपनी ज्ञानी गधे हैं ।

प्रवचन कर रहे जो, मजमा लगाये
वो राज , योगी, फ़सादाई गधे हैं ।

कई तो पढ़े हैं  किताबें  अनेको
गौर से देखने पर बस किताबी गधे हैं ।

कुछ देशी भेष में कुछ विदेशी रंग में हैं
मगर रेंकने पर सब सियासी गधे हैं ।

वो गरमी के गधे हम बरसाती गधे हैं
इनमें भी अनेको करामाती गधे हैं ।

चलो ढूढ़ लें,  विरादर को अपने
सभी तो यहां पर,बस गधे ही गधे हैं ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोकभवन, भोपाल
दिनांक : 06.07.2026