मंगलवार, 24 मार्च 2026

शेर

मार्च/24

इश्क इक जुनून सूफियायी है
रूह से रूह तक बहा करती है।


गमे जुदाई में लिपटी तेरी शोख़ तब्बस्सुम
आ के देखे कोई इश्क कहां जिन्दा है ।

उमेश

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