गुरुवार, 25 जनवरी 2024

कर्तव्य बोध हो प्रथम चरण 
अधिकार बोध अगले पग पर
राष्ट्र समर्पित जब हर गण हो
गणतन्त्र तभी प्रगति पथ पर ।

उल्लास उमंग क्षणिक जब हो
उत्प्रेरक जीवन कर न सके
नाभि जगे स्वस्फूर्ति मथे


सोमवार, 1 जनवरी 2024

आ रहे राम

आ रहे
हैं राम
संवर जा रे मानव
हुआ नया भिंसार
सम्हल जा हे मानव । 

रामराज्य को ना देखा पर
रामराज्य पर आस टिकी
ठुमक ठुमक कर आते राम
अधरों पर मुस्कान टिकी ।

आओ सब मिल स्वागत कर लें
नव प्रभात की बेला में
रामराज्य है मधुरिम आभा
हर सपनों के रेला मे ।

मांज मांज कर हर मन तन को
पशु से मानव कर ले तू
नव युग के इस सन्धिकाल में
संग राम के हो ले तू ।

नव वर्ष नहि नव विहान है
चेतनता का आलिंगन कर
अगवानी कर रामराज्य की
मुस्कानों से जीवन भर ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
राजभवन भोपाल
दिनांक ०१ . ०१ . २०२४









गुरुवार, 28 दिसंबर 2023

रसिक मन

 

दिगम्बरी गेह ले मुझ पर पसर जाओ तनिक
ये उघाड़ी गेह आतुर, तुझको पुकारे ऐ  सखी ।

नासिका मिल नासिका से, सुरभित करे जिस घड़ी
दृग सरोवर में तनिक, मुझको उतरने दो सखी ।

घिर कुन्तलों के मेघ, विधु, जो तनिक सकुचाये तो
अधरों पे धर अधर , चूषण सुधा करने दो सखी ।

कर मध्य आनन जब भरूं मैं, रुचिकर तेरा 
रक्तिम अपने गंड , अधरों पे आने दो सखी । 

सिहरता सा धौंकता सा वक्ष मेरा जो चाहता
 उरोजद्वय को तनिक उन पर बहक जाने दो सखी ।

कटिबन्ध जब कटिबन्ध से लाड़ करने लगें
हस्तद्धय स्कन्ध पर स्निग्ध आने दो सखी । 

जब तुम्हे अहसास दे प्रवेश तुझमें मैं करूं
अस्तित्व मेरा, भर अंक में, लुप्त होने दो सखी ।

सघनता की उत्तेजना, अवलेह बन ये श्वेद आये
चरण दोनों खोल अब, गेह भर कस लो सखी ।

चरम पर आ स्खलित जब अस्तित्व मैं तुझमें करूं
नव चेतना स्फूर्ति अर्पण,कस बन्ध कर दो ऐ सखी ।

कल्पनाओं में छंद रच रच स्पर्श तेरा कर रहा
यथार्थ में झकझोरने को अब तो आ जाओ सखी ।



उमेश कुमार श्रीवास्तव
राजभवन भोपाल
दिनांक २९ . १२ . २०२३

मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

मैं वापस आ रहा हूं तुझसे मिलने को
बिछुड़े तंतु तरंगो से फिर जुड़ने को । 
श्वांस श्वांस परिहार लगा जग
किलकारी थी व्यथा जनित
प्राणवायु से रिक्त शिखर सब

मंगलवार, 19 दिसंबर 2023

इक झटके से उनने दिल को , प्रस्तर संज्ञा दे डाली
मेरे तन का यह अदना टुकड़ा, प्रेमासव से रचा गया था |

उम्र कहती है कहां, अब प्यार को तुम रोक लो
प्यार का तब ही मज़ा ,जब अनुभवी से प्यार हो ।

गुरुवार, 14 दिसंबर 2023

कटु स्मृति

था उत्सव 
शपथ ग्रहण का
सूबे के काबीना का
कर्तव्यबद्ध थे सभी विज्ञजन
जनसमुद्र में जाने को ।

तत्परता  से चले सभी थे
अपने अपने पोतों से
लहरों पर हिचकोले खाते
बचते भवरों के गोतों से ।

बडी भंवर ने ऐसा रोका
सभी धरा पर उतर रहे
दूर थी मंजिल शीघ्र पहुंचना
इतर राह सब निरख रहे ।

दिखा विवर इक खंडित दरवाजा
लालाइत सब बढ़े उधर
सजग था प्रहरी अवरोध लगाये
पर हिकमत से गये उतर ।

किंचित दर्शन लाभ लिया फिर
बैठक को प्रस्थान किया
पहुँच वहां जो पाया हमने
जैसे विप्लवआह्वान किया ।

तनिक ठिठक लहरों को तोला
तृण सा पाया जब खुद को
रणछोड़ ही बनना उचित जान तब
रण से बाहर प्रस्थान किया ।

राह सरल कहां थी वह भी
चहुं दिश अवरोधक अथाह सगर
भीटा एक बना अवलम्ब
कूद चढ़े तब पाई डगर ।

शपथ ग्रहण का यह उत्सव
स्मृतियों में अब अजर अमर
कशम तीसरी खाई मन ने
ना जायेंगे अब ऐसी डगर ।

उमेश कुमार श्रीवास्तव
१४-१५ दिसम्बर २०२३
राजभवन , भोपाल






सोमवार, 9 अक्टूबर 2023

जगत के सात आयाम

*जगत के सात आयाम*
१. गर्भस्थ शिशु
२. नवजात से चौदह वर्ष की आयु
३. चौदह से पच्चीस वर्ष की आयु
४. पच्चीस से पचास वर्ष की आयु
५. पचास से पच्चहत्तर वर्ष की आयु
६. पचहत्तर से सौ वर्ष की आयु
७. जन्म के पूर्व मृत्यु के पश्चात
ये सभी अपनी जिस दृष्टि बुद्धि विवेक व ज्ञान से दृष्टि कोण बना जगत को देखते हैं वे उनके समूह हेतु एक आयाम है जो सभी का पृथक पृथक है वे एक दूसरे के आयाम में प्रवेशित भी नही हो सकते ।
आज दिनांक ०९ . १० . २०२३ का मेरा वैचारिक ज्ञान ।