दिल की बात जुबां पे न आये
कम्बख्त चेहरा , जुबां बन
कह देता हर राज - ए - दिल जमाने से ।
( केदारनाथ त्रासदी पर )
फटा दिल, शैलाब अश्कों का बहा
परवर दिगार !
बेमुरौवत रहनुमाओं की सजा
क्यूं दी तूने, अपने खिदमतगारों को ।
जिन्दगी तू ही बता, कैसे तुझे प्यार करूं
तेरी हर इक सुबह,उम्र कम कर देती है जो ।
मरहम न सही कोई जख्म ही दे दो
अहसास तो हो, कोई भूला नहीं हमको ।
जिन्दगी में रंग गुलज़ार से मांगा करो
ख़िज़ा में मस्त रहना, ख़ार से मांगा करो
गिड़गिड़ाया मत करो भिखारी की तरह
तुम जो मांगा करो, अधिकार से मांगा करो
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