रविवार, 28 जून 2026

शेर

सोचता हूं हर बार 
दिल की बात जुबां पे न आये
कम्बख्त चेहरा , जुबां बन
कह देता हर राज - ए - दिल जमाने से ।


( केदारनाथ त्रासदी पर )
फटा दिल, शैलाब अश्कों का बहा
परवर दिगार !
 बेमुरौवत रहनुमाओं की सजा
 क्यूं दी तूने, अपने खिदमतगारों को ।


जिन्दगी तू ही बता, कैसे तुझे प्यार करूं
तेरी हर इक सुबह,उम्र कम कर देती है जो ।

मरहम न सही कोई जख्म ही दे दो
अहसास तो हो, कोई भूला नहीं हमको ।

जिन्दगी में रंग गुलज़ार से मांगा करो
ख़िज़ा में मस्त रहना, ख़ार से मांगा करो
गिड़गिड़ाया मत करो भिखारी की तरह
तुम जो मांगा करो, अधिकार से मांगा करो

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