गुरुवार, 5 नवंबर 2026

शेर

चाह तो नही थी कि जाने दूं
पर , तुम्हारी चाह देख
अपनी चाह बदल दी मैने ।

दर्द के मरहम सा अहसास था
दर्द से निज़ात की चाहत
बदल दी मैने ।
उमेश ०६.११.२०२६

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