आनन्द मार्ग
साधु प्रवृति न त्यागो तुम
विज्ञ बनो हर ज्ञान धरो संग
आश की डोर न त्यागो तुम
एकाग्र करो मन दृढ़ करो
कोमलता त्याग बल धारो तुम
साधु , विज्ञ , आशावादी
एकाग्र और जो बलशाली
आनन्द उसी के वश में है
यूं पंच राग संधानो तुम ।
उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोक भवन , भोपाल
दिनांक : ०९.१२.२०२५
साधु वृत्ति क्या है
साधु वृत्ति धारी वह है जिसका उत्तम सदाचार है और श्रेष्ठ आचरण व्यवहार है जो मोह-माया, लालच जैसे दुर्गुणों से दूर रहता है और दूसरों की सहायता को सदैव तत्पर रहता है; यह एक ऐसी जीवनशैली है जो सादगी, संयम, दया और आत्म-नियंत्रण पर केंद्रित होती है, जहाँ व्यक्ति भौतिक सुखों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक शांति की ओर बढ़ता है और दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करता है।
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