ग्रेगोरियन कैलेण्डर के वर्ष २०२५ की विदाई की व नव वर्ष २०२६
के आगमन की सभी को अनन्त शुभकामनाएं
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जो जाने को आतुर बैठाउसे रोक सका क्या कोई
मोक्ष मिले यूं ऐसा जिसको
उसे टोक सका क्या कोई ।
बिदा करो सब प्रफुलित मन से
फल जो चाहे दिये रहा वो
कर्म नदी की राह रहा वह
विदा ले रहा आज है जो ।
छोड़ चला है वह अपनी थाती
नव आगन्तुक नये वर्ष को
विगत हुआ आगत कल जो था
आगत स्वागत सब कर लो ।
नये वर्ष की नई दिशाएं
चहुंदिश जाती राहें है
गत आगत की संगम राहे
चलो हमें पुकारे हैं ।
नई रश्मि से, ले नई उमंगे
आगे कदम बढ़ायेंगे
इस पड़ाव से मंजिल तक
हम उज्ज्वल भविष्य बनायेंगे ।
उमेश कुमार श्रीवास्तव
लोक भवन , भोपाल
दिनांक ३१. १२.२५